Sunday, 18 December 2011

"मत दर कि दूनियां वाले तुझ पर पत्थर उछालते हैं.."

-------------------------"अब्र-नामा" से------------------------------
पहुंचोगे तुम साहिल पर
लाख जोर तुफां लगाए’
जो हो मौजों की लगन
चट्टानों से टकराने में;
गुलशन में तेरे भी
फूलों का बसेरा होगा,
जो लहू पुकारता बहेगा
कांटों पे चलने में;
आता है अकेला जिंदगी में
रोता,हमसफर कोई नहीं,
कारवां तो यूं ही बन जाएंगे
आगाज तो कर कदम बढ़ाने में;
मत डर कि दुनिया वाले
तुझ पे पत्थर उछालते हैं,
सारे काम आएंगे तेरे
एक दिन आशियां बनाने में;
------धन्यवाद------------
(२८-०४-१९९७)

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