Thursday, 8 December 2011

----आ मेरे हमदम जरा

आ मेरे हमदम जराकी
प्यार बातें करें,
जा रही है जिंदगी
दो-चार सही बातें करें;
’पल’ जो कल हो गया
उसकी क्यूं शिकायतें करें,
वस्ले-हिज्र को छोड़ कर
इंतजार की बातें करें;
फूल कांटा हो गया तो क्या
खाक हुआ गुलाब तो क्या,
पतझड़ कट जायेगा यूं ही
आ बहार की बातें करें;
काफिले चले गये आखिर
फासले कम होंगे क्या,
धड़कनों की हौसला-अफजाई को
आ रफ्तार की बातें करें;
मौहब्बत तो बस मौहब्बत है
जिस्म तो दीवार है,
इस पार के तलबगार सब
आ उस पार की बातें करें;
उस पार की बातें करें

1 comment: