Thursday, 29 December 2011

-------------------तुम पर हमारी मुहर लगी है-----------------
(मेरे हमवतनों को समर्पित,जो त्रस्त,पस्त हैं)
तुम्हारे मालिक हुआ करते हैं हम,
तुम पर हमारी मुहर लगी है;
इस बार भी आओ,जरूर आना,
तमीज-ओ-तहजीब अपने साथ लाना;
अवाम के दस्त-ओ-दिल में इस दफा
जमे शोलों की पक्की खबर लगी है;
..........जारी........................आ

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